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Friday, December 8, 2017

What is VPN in Hindi ?

हेलो फ्रेंड्स अमित ,आज के इस पोस्ट में हम VPN के बारे में जानेंगे की VPN क्या होता है ? VPN को कैसे यूज़ किया जाता है ? आज का पोस्ट basic hacking का पार्ट है ,आज ऑनलाइन दुनिआ में VPN का इस्तेमाल बहुत  ज्यादा हो रहा तो इसलिए इसकी जानकारी होना जरूरी है। हम इस पोस्ट में VPN के बारे में detail में जानेंगे।

VPN क्या है ?

VPN का फुल फॉर्म होता है virtual private network . VPN का main use Banks ,बड़ी कंपनी और सभी तरह के gov sector में किया जाता है। वैसे आजकल बहुत से लोग VPN use करते हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता की इसके फायदे और नुकसान क्या है। तो चलिए जानते हैं VPN के बारे में।


जब हम internet से कनेक्ट होते हैं तब हमारा जो भी ISP (internet service provider )होता है वो हमे उसी country का IP दे देता है। अब जब हम इस IP से कनेक्ट होकर online जो भी काम करेंगे उसका पता ISP/Government कर सकती है, मतलब वो हमे trace कर सकती है। ऐसे हम हम अपनी प्राइवेसी को सेफ रखने के लिए भी VPN का इस्तेमाल करते हैं। जब हम VPN से कनेक्ट होते हैं तब हमे एक नया IP मिलता है और हमरी रियल IP hide हो जाती है।


VPN कैसे काम करता है ?

दोस्तों ,अगर हम VPN की बात करें तो VPN एक tunnel की तरह काम करता है जिससे गुजरने वाले data पूरी तरह से encrypted होते हैं। हम किसी वेबसाइट को ओपन करते है या फिर इनफार्मेशन शेयर करते हैं तो हमारा ISP या फिर कोई हैकर चाहे तो sniffing कर सकता है मतलब मेरे और वेबसाइट के बीच share होने वाले डाटा तो चुरा सकता है। ठीक इसी तरह जब बैंक internet से कनेक्ट होकर एक दूसरे को डाटा ट्रांसफर करते है भी उन्हें sniffing का खतरा बना रहता है। तो ऐसे condition में VPN काफी अच्छा ऑप्शन है ,जैसे ही VPN connect होता है तो एक नई IP मिलती है और user और website के बीच एक tunnel create हो जाता है। अब जो भी data share होता है वो उसी tunnel से होकर गुज़रता है ,और data encrypted हो जाता है। तो इस तरह VPN का यूज़ sniffing/hacking से बचने के लिए किया जाता है। 

""हम आने वाले पोस्ट में जानेंगे की sniffing कैसे की जाती है। हम एक open wifi network create करेंगे और जब उससे users जुड़ जायेंगे तो हम उन्हें sniff करके ये देख पाएंगे की वो कौन से वेबसाइट visit कर रहे हैं और साथ ही अगर वो कुछ इनफार्मेशन जैसे username ,email id etc ऑनलाइन fill करेंगे तो वो भी जान पाएंगे। Network Sniffing एक important और मज़ेदार चैप्टर है जिसे हम आगे detail में जानेंगे। "" 
VPN use करने के फ़ायदे और नुकसान -

VPN यूज़ करने के फायदे और नुकसान दोनों ही है ,अगर हम फायदे की बात करें तो हमारी identity छिपी रहती है साथ ही हमारा डाटा encrypted होता जिससे प्राइवेसी safe रहती है। साथ ही ,अगर कोई website /video/content किसी specific country में block हो तो VPN का इस्तेमाल करके उसे access किया जा सकता है। जैसे अगर कोई video /website Indian gov. ने बैन कर रखी है लेकिन बाकि दूसरी country उसे access कर पा रहे हैं तो हम VPN की मदद से दूसरी country का IP से कनेक्ट होकर use कर पाएंगे। 
अगर नुकसान की बात करें तो हम जिस कंपनी से VPN लेते हैं वो चाहे तो पर्सनल इनफार्मेशन share कर सकता है। आज market में बहोत से free VPN available हैं , लेकिन इनका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए हमे एक trusted VPN का ही इस्तेमाल करना चाहिए। 

VPN कैसे use करें ?

आज ऑनलाइन mobile और pc दोनों के लिए ही बहुत से VPN available हैं। कुछ free है तो कुछ paid . paid वाले VPN में आपको अनलिमिटेड बैंडविड्थ मिलता है और ज्यादा speed भी। 
इन्हे use करना बहुत आसान है ,बस आपको इन्हे Download करना है open करना है। ओपन करते ही आपको बहुत से country का option मिलता है ,इनमे से किसी को भी select करना है और VPN कनेक्ट हो जाता है। 
अगर फ्री VPN की बात करें तो मोबाइल के लिए आप Turbo VPN को play store से download करके use कर सकते हैं।  
 

मुझे उम्मीद आपको मेरा यह पोस्ट अच्छा लगा होगा तो आज हमने जाना VPN क्या होता है और उसके उसे क्या है इंटरनेट की दुनियां में दोस्तों प्लीज like एंड शेयर माय पोस्ट | धन्यबाद 
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हैकरों का ब्राउज़र Tor Browser क्या है ? tor browser in Hindi

हेलो दोस्तों में अमित इस पोस्ट में आज हम बात कर रहे हैं और Tor Browser की। जी हाँ हैकरों का ब्राउज़र , और हम ऐसा क्यों कह रहे हैं जानेंगे इस पोस्ट में। ये Tor Browser क्या होता है ? क्या हमें Tor Browser यूज़ करना चाहिए ? इसके क्या फायदे एवं नुकसान है ? Tor Browser का फुल फॉर्म होता है और the onion router । जैसे एक Onion(प्याज़) मे बहुत सारी layers मिलती है बिलकुल वैसे ही Tor Browser भी उसी तरह काम करता है, यानी onion के layers के जैसा ही ये IP की लेयर बनाता है जिससे आपकी IP hide हो जाती है। 

अपनी पहचान छुपाने के लिए सबसे ज्यादा यूज होने वाला Browser है । इस ब्राउजर का इस्तेमाल दुनिया के कुछ देशों को छोड़कर बाकी सभी जगह होता है और यह इंडिया में पूरी तरह लीगल है , मतलब इसका इस्तेमाल बिना किसी ऱोक टोक के कर सकते हैं। लेकिन इस ब्राउज़र में ऐसा क्या खास है क्या वजह है जिससे इस में रोक लगाई जा सकती है ? आखिर यह इतना फेमस क्यों है ? तो चलिए जानते हैं इसके बारे में थोड़ा विस्तार से या कैसे काम करता है।
 
Tor Browser यूज़ क्यों होता है ?
दोस्तों tor का इस्तेमाल वही लोग करते हैं जिन्हे अपनी ऑनलाइन पहचान छिपाने की जरूरत पड़ती है , या फिर वैसे लोग जो अपनी privacy को लेकर जयादा फ़िक्र करते हैं। और हाँ , आज की इंटरनेट दुनिआ में जहाँ ऑनलाइन क्राइम बढ़ रहे है , अपनी पहचान छिपाना शायद जरूरी भी है। क्यों की बहुत वेबसाइट आपसे बिना परमिशन मांगे आपके व्यक्तिगत जानकारियाँ जमा करती रहती हैं। 

आप ऑनलाइन कुछ भी करें आपकी प्राइवेसी सेव रहती है। डीप वेब या डार्क वेब को यूज़ या विजिट करने में भी इसी Browser का इस्तेमाल होता है। 

Tor Browser कैसे काम करता है ?
Tor Browser दूसरे किसी ब्राउज़र जैसे firefox/chrome से अलग है। इसका मुख्य काम होता है यूजर के पर्सनल IP को हाइड करना जिससे कि यूजर क्या कर रहा है यह ट्रैक न हो सके। जैसा कि आप जानते हैं IP का मतलब इंटरनेट प्रोटोकॉल होता है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि आप कौन सा लैपटॉप मोबाइल यूज कर रहे है, आपकी OS कौन सी है, आपका लोकेशन क्या है। और इसी वजह हैकरों लिए ये सबसे अच्छा ब्राउज़र माना जाता है। 
यह आपकी IP को लगातार switch करता रहता है , और ip के आगे एक चेन सा बना देता है जिससे आपको कभी usa uk जैसे country का IP मिलता रहता है। और आप का वास्तविक IP दूसरे IP से ढका होता है जिससे आपको ट्रेस करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

क्या इसे यूज करना चाहिए ?
हाँ , मै recommend करता हूँ , लेकिन दोस्तों यह डिपेंड करता है आपके ऊपर कि आप ऑनलाइन क्या करते हैं। अगर आप कुछ गलत काम करते हैं (जो कि नहीं करना चाहिए) जैसे है हैकिंग ,तो आपको अपनी पहचान छुपानी पड़ती है या फिर अगर आप चाहते हैं कि मेरी प्राइवेसी छिपी रहे तो भी आप इसका यूज कर सकते हैं। 
Tor Browser को कैसे यूज़ करें ?
इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे आप पहले अपने ब्राउज़र पे जाएँ और search करें tor डाउनलोड।
 

अब आपको जो सबसे पहले वेबसाइट मिलेगा उससे डाउनलोड कर लें। अब आप इसे इनस्टॉल करके डायरेक्ट ही यूज़ कर सकते हैं। 

नोटTor को ओपन करने के बाद इसके बॉक्साइट को मैक्सिमाइज़ ना करें मतलब आप इसके विंडो साइज को बड़ा ना करें क्योंकि इससे आपकी प्राइवेसी कम रह जाती है।
मुझे उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट अच्छा लगा होगा तो आज हमने जाना Tor ब्राउज़र क्या होता है | 
प्लीज like एंड शेयर पोस्ट | धन्यबाद

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What is Dos attack and DDOS attack in Hindi ?

DOS attack क्या होता  है -
Dos का फुल फॉर्म होता है "denial of service" ,अब इसका नाम ही बहुत कुछ बता देता है मतलब किसी सर्विस को देने से इंकार करना। तो ये सर्विस क्या होती है क्यों इंकार किया जाता है जानते हैं पुरे विस्तार से। 
                             Dos Attack में हैकर किसी website/network को टारगेट बनाता है और ,इतनी ज्यादा ट्रैफिक generate करता है की वेबसाइट/नेटवर्क उस ट्रैफिक को हैंडल नहीं कर पता है और आख़िरकार बंद हो जाता है। ऐसे में उस वेबसाइट के जितने भी रियल user होते हैं वे भी वेबसाइट पे available डाटा को access नहीं कर पाते हैं। 

                                    फ्रेंड्स , हर वेबसाइट या सर्वर का एक लिमिट होता है की वो एक टाइम में ज्यादा से ज्यादा कितने users को हैंडल कर सकता है ,लेकिन ये अटैक ऐसा होता है जिसमे लगातार बहुत ज्यादा ट्रैफिक generate होती है और जिसके वजह से सर्वर स्लो हो जाता है और कई बार क्रैश भी। 

अगर हम वेबसाइट/सर्वर की बात करें तो आपने कई बार देखा होगा ही कुछ websites जिनपे बहुत ज्यादा ट्रैफिक आती है बहुत ही स्लो हो जाता है। जैसे की , websites जिनपे किसी एग्जाम का रिजल्ट आना होता है तो उनपे एक ही टाइम में बहुत सारे लोग एक साथ विजिट करते हैं और वेबसाइट थोड़ा स्लो काम करता है।माना ये जो वेबसाइट है उसकी लिमिट है की वो per second 1000 लोगों को हैंडल कर सकता है ,लेकिन अगर इस वेबसाइट पे Dos Attack हो जाये मतलब की इस वेबसाइट पे fake traffc आनी शुरू हो जाये तो per second user बढ़ जायेंगे और आख़िरकार सर्वर स्लो होते होते बंद भी हो सकता है , तो ऐसे condition में जो real विजिटर है वो अपना रिजल्ट नहीं देख पाएंगे।

तो दोस्तों हम इसे ही Dos Attack कहते हैं जिसमे fake traffc भेजकर सर्वर को इतना busy कर दिया जाता है की वो स्लो होते होते बंद हो जाता है और उस वेबसाइट के रियल users डाटा एक्सेस नहीं कर पाते हैं। 

DDOS attack  क्या होता है- 
DDOS का फुल फॉर्म होता है Distributed denial of service . ये भी DOS अटैक ही है लेकिन ये डिस्ट्रिब्यूटेड अटैक होता है। तो दोस्तों ये थोड़ा अलग है Dos attack से ,क्यूंकि इसमें कोई एक host/system अकेले ही अटैक नहीं करता है है बल्कि बहुत से सिस्टम/कंप्यूटर एक साथ अटैक करते हैं। इस अटैक में सिर्फ एक ही कंप्यूटर यूज़ नहीं होता है। DDOS काफी सोचा समझा और खतरनाक अटैक माना जाता है। 
                                       इस अटैक में हैकर दुनिआ भर के बहुत सारे system को अपने virus से affect करता है और botnet तैयार करता है। या फिर हम ये कह सकते हैं की ये कंप्यूटर जिनमे virus आ जाता है वो उस हैकर के Robot बन जाते हैं और वही करते हैं जो हैकर कहता है। तो हैकर जब botnet बना लेता है तब वो इन systems का यूज़ करके एक साथ किसी टारगेट वेबसाइट पे DDos attack करता है। 
                                           जैसा की हमने पहले भी जाना की सर्वर एक टाइम में एक लिमिट तक ही ट्रैफिक हैंडल कर सकता है, लेकिन DDOS ATTACK में हैकर अपने रोबोट्स को आर्डर देता है और बहुत सारा fake ट्रैफिक generate होता है जिसके वजह से वह वेबसाइट down या पूरी तरह बंद हो जाती है।  


 मुझे उम्मीद है कि आपको मेरा यहाँ पोस्ट अच्छा लगा होगा तो आज हमने जाना dos attack और ddos attack क्या होता है | 
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Thursday, December 7, 2017

What is hacking in hindi | Type of hacker?

हैकिंग क्या है : 
Networking and computing मे हैकिंग का मतलब है technical effort करके बिना किसी की permission लिए हुए दूसरे network or computer को एक्सेस करना | Hacking किसी भी computer or network पर unauthorized intrusion को कहते है जिसमे हैकिंग करने वाले को हैकर कहा जाता है और वो बिना किसी permission के illegally दूर के computer or network को access करता है | यह हैकर एक बार system को access करने के बाद अपना goal पूरा करने के लिए system or network के security features को change कर देता है | Hacking करने वाला hacker अपने काम मे technically बहुत perfect होता है और उसको network or computer system के बारे मे depth knowledge होती है तभी वो किसी दूसरे के network मे अंदर जा सकता |


वैसे पहले के time मे “hacking” term को किसी constructive या clever technical work करने वाले के लिए use किया जाता था | (computer systems के लिए hacking use मे आये जरुरी नहीं था) लेकिन आज हैकिंग ऐवम hackers दोनों term को ज्यादातर किसी wrong computer related activity or internet\network पर malicious programming attacks से associate किया जाता है | 

Ethical hacking : हैकिंग को बहुत सारी countries में serious crimes माना जाता है | अगर hacking किसी organization के द्वारा request करने पर किसी contract के अन्तर्गत permission से की जाये (जो की legal हो) तो उसको legal कहा जाता है ऐवम हैकर के लिए ethical hacker की term use की जाती है | ये legal होती है क्योकि ethical hacker के पास target को probe करने का authorization होता है |

Types of Hackers : 
  1. Black hat hacker : Black-hat hackers को media मे सबसे ज्यादा discuss किया जाता है | Black hat hackers वो hackers है जो की personal purpose के लिए rules को तोड़ते है and illegally दूसरे computer security को break करते है | Example – किसी दूसरे के credit card number को चोरी करना, किसी computer network को money के लिए break करना | इनको Cracker भी कहा जाता है |
  2. White Hat Hackers: White hat hackers अच्छे लोगो के लिए count किया जाता है ऐवम ये वो hackers होते है जो की computer network की weakness को fix करने के लिए system मे access करते है, या फिर ये वो computer security experts होते है जो की *penetration testing ऐवम दूसरी methodologies मे specialize होते है ऐवम ensure करते है की company की information and systems secure हो | ये hacker black-hat hackers के बिलकुल opposite होते है and अपनी exprties and abilities को अच्छे, ethical, and legal purposes के लिए use करते है न की किसी बुरे, unethical, या क्रिमिनल purposes ke लिए | इनको Ethical Hacker भी कहते है | 
  3. Grey hat : ये hacker white and black hat hackers की बिच की category मे होते है ऐवम ये computer system को बिना किसी authority के break करते है जिससे की system owner को उनको weaknesses reveal कर सके | चाहे ये hacker किसी अच्छे काम के लिए ही system को break करते है but फिर भी ये activity illegal होती है क्योकि बिना owner की permission के system break किया जाता है | 
  4. Script kiddies : ये वो hackers होते है जो की बहुत ज्यादा technical experts नहीं होते लेकिन ये दुसरो के बनाये tools का use करते हुए hacking करते है |
  5. Hacktivis : :ये hacker किसी religion or politically motivate हो कर हैकिंग करते है जिससे की कोई special message भेजा जा सके | जैसे की किसी political website को hack करके अपना special message वहां पर छोड़ देना | 
   आप अगर hacking का कोई कोर्स करना चाह रहे है तो Indian School of Ethical Hacking से कर सकते है | यहाँ पर आपको अलग अलग duration के अलग अलग हैकिंग course offer किये जाते है | Visit Website at – www.isoeh.com और आप गूगल जाकर भी सीख सकते हो जैसेकि www.nullbyte.com ,www.eccouncil.com ,www.hackingtutorial.com और भी साइट है | 
प्लीज like  एंड शेयर माय पोस्ट | धन्यबाद
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