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Thursday, November 23, 2017

Android Vs iPhone - Why iPhone is more secure ?

हाय दोस्तों आज में इस पोस्ट आपको बताऊंगा कि एंड्राइड Vs iPhone में में से सबसे ज्यादा कौन secure है | तो चलिये जानते है iphone एंड्राइड से ज्यादा सिक्योर क्यों है ?ये ज्यादातर लोग जानते है iPhone थोड़ा-सा ज्यादा  सिक्योर है एंड्राइड से, ऐसा नहीं एंड्राइड एक ख़राब ऑपरेटिंग सिस्टम है एंड्राइड ये बहुत अच्छा ऑपरेटिंग सिस्टम है | लेकिन iPhone ज्यादा सिक्योर है एंड्राइड से क्यों है इसके बारे में हम आज बात करेंगे| 
                             तो सबसे पहले बात करेंगे iPhone सबसे ज्यादा सिक्योर क्यों है ?तो पहले देखते है एंड्राइड क्या है कैसे काम करता है | एंड्राइड में जो appstore होता है google playstore  होता है | वहाँ पर बहुत सारी एप्लीकेशन है |और कोई भी एक developer अकाउंट 5000 -6000 रुपये देखकर वहाँ पर अकाउंट बना सकता है|और एप्लीकेशन को publish कर सकता है अगर उसके guideline के खिलाप नहीं जाते तो अब जैसे कि आप जानते हो हर वेबसाइट की guideline होती है आप उल्टी - सीदी चीज़े नहीं डाल सकते जैसे पोर्नग्राफी ,वायलेंस ये सब ज्यादातर में allow नहीं होता क्योकि ये सब human के लिए अच्छी नहीं है | अगर आप कोई एक normal एक अच्छी app बनाते हो प्रोडक्टिव काम करते हो तो आप उसे बिल्कुल publish कर सकते हो google playstore पर ,तो तरह -तरह की एप्लीकेशन देखती है गूगल प्लेस्टोरे पर और entry barrier बहुत ही कम है | मतलब एक एंड्राइड डेवलपर बनने के लिए जो बैरियर एंट्री का वो कम है|  एंड्राइड डेवलपर बनना काफी easy है इन comparison iphone ,ios के लिए एप्लीकेशन बनना | तो इसका ये मतलब बनता है वो एंड्राइड स्टूडियो tools है वो सारे फ्री में मिल जाते है | तो इसका मतलब ये एंड्राइड के लिए एप्लीकेशन बनाना बहुत ही आसान है | इसे एक ओर पॉसिब्लिटी आती है बहुत सारे डेवलपर है और बहुत सारी एप्लीकेशन है | जितनी ज्यादा एप्लीकेशन ,सॉफ्टवेयर किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बनते है malware ,spyware ,वायरस,ट्रोजन ,worm इन सबकी भी पॉसिबिलिटी बढ़ जाती है इनकी quantity बढ़ जाती है | क्योकि ज्यादा सॉफ्टवेयर बन रहे है डेवलपर बहुत ज्यादा है तो कुछ डेवलपर अच्छे होते है तो कुछ लोग अपना सैतानी दिमाग चलाते है |में आपको बता दूँ दुनिया भर में जितने भी वायरस होते है 70% तक
organised  जो  क्रिमिनल होते है उनके लिए काम करते है |                                    
               मतलब जो organised क्रिमिनल  organisation होती वो instantly ऐसे वायरस को बनाती है जैसे  malware ,spyware,ransomware को बनाती है| ताकि लोगों के डेटा को चुराया जा सके | उनकी पर्सनल इनफार्मेशन को चुराया जा सके | और ऐसे module बनाने के बाद ransomware demade बोलते है न इन वायरस का उसे लोगो के डेटा चुराने में उसे करते है | और उस डेटा को बेचा भी जाता है | तो फिर एंड्राइड एप्लीकेशन बहुत सारी  है और डेवलपर भी बहुत है डेवलपर बहुत सारे मतलब यहाँ पर बुरे डेवलपर ज्यादा बन रहे है | ज्यादा डेवलपर मतलब खुरापाती लोग भी ज्यादा है| और एप्लीकेशन में कितनी फ़िल्टरिंग है नहीं फिर भी लेकिन कितनी ज्यादा नहीं है | मैंने देखा है ऐसी भी एप्लीकेशन है जैसे सुहागरात तरीके ऐसी उलटी सीदी एप्लीकेशन देखने को मिलती है वो  देखने को मिल जाती है | 
                              अब इसलिए एंड्राइड में ज्यादा वायरस है | और इसमें अपडेट होते है वो fequent है |
अब बात कर लेते है iPhone कि iphone में एप्लीकेशन बनाना इतना आसान नहीं है वहाँ पर एंट्री बैरियर बहुत बहुत बड़ा है | इसमें आप जल्दी से एंट्री नहीं  सकते यहाँ पर जो एप्लीकेशन होती वो बहुत ही स्ट्रीक फ़िल्टरिंग होती है | यहाँ पर हर एक ऍप्लिकाशन को हर बारिकी से चेक किया जाता है | क्युकी उनका ऑपरेटिंग सिस्टम भी खुद का होता है और डिवाइस  भी खुद के   होते है | तो पूरी जुम्मेदारी उनकी बन जाती है | जब की देखा जाये एंड्राइड में ऑपरेटिंग सिस्टम होगा गूगल का लेकिन हैंडसेट किसी का भी हो सकता है sumsung ,micromax ,
appo ,vivo हो सकता है | अलग -अलग variety देखने को मिलती है एंड्राइड में | एंड्राइड को देखा जाये तो बहुत flexible है इसको बहुत ज्यादा customized किया जा सकता है |बल्कि iphone में आपको जे सब नहीं मिलता जेलब्रेक ,अनलॉक कर सकते हो फिर कितनी ज्यादा पॉसिबिलिटी नहीं है |
                                                 तो iphone में बहुत ज्यादा फ़िल्टरिंग है | और इसके इतने ज्यादा डेवलपर भी नहीं है| एप्लीकेशन भी इतनी ज्यादा available नहीं है | वहाँ जो एप्लीकेशन मिलती है वो trusted  source और बड़ी -बड़ी कंपनी से मिलती है हलाकि ऐसा नहीं की छोटे-छोटे  डेवलपर  भी है भैया जिन डेवलपर का इंटरेस्ट है वो तो ios एप्लीकेशन बनाने का वो तो बनाएँगे |इसलिए iphone इंडिया में खरीदने वाले कम  है और बहुत देशो में तो बहुत ज्यादा है | लेकिन कुल मिला कर देखा जाये तो एंड्राइड ज्यादा बेचता है | ज्यादा डेवलपर मतलब ज्यादा वायरस |
                                             विंडोज जहाँ एप्लीकेशन बहुत कम है वहाँ वायरस भी कम है | आपने विंडोज फ़ोन नाम तो सुना ही होगा | दोस्तों विंडोज डेवलपर बहुत कम है तो उसमे वायरस भी नहीं कम है | तो कुल मिला बात यह है कि जितने ज्यादा डेवलपर उतने  एप्लीकेशन और उतने ज्यादा वायरस जैसे एंड्राइड |
जितने कम डेवलपर उतने कम एप्लीकेशन उतने कम वायरस जैसे iphone | इसलिए iphone ज्यादा secure है |
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                                                                         धन्यबाद

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Saturday, November 18, 2017

Why data is corrupt? What is the problem?

हाय दोस्तों आज में इस पोस्ट आपको बताऊंगा कि डेटा corruption किस प्रकार होता है हमारे किस भी स्टोरेज मीडिया का जैसे हार्डडिस्क ,pendrive ,मेमोरीकार्ड और भी अधिक हमारा डेटा corrupt हो जाता है | आपने बहुत बार देखा होगा और आपके साथ भी हुआ होगा कि आप जब कोई डेटा pendrive में ले जाते है दूसरे सिस्टम में लगाते है और डेटा corrupt हो जाता है | ये data corruption को  आज हम आज इन डेप्थ नॉलेज जानेगे वह किस प्रकार होता है | आपके साथ  ऐसा भी हुआ जब आप कोई प्रेजेंटेशन देने जा रहे है जब आपने को pendrive सिस्टम लगाते है वैसे ही आपकी फाइल,या प्रेजेंटेशन फाइल corrupt हो गयी | तो  जानते है यह किस प्रकार होता है |
तो दोस्तों हम लोग जानते डेटा corruption क्या होता है | इसे पहले हम जानते है डेटा क्या होता है हम यहाँ बात कर रहे है डिजिटल डेटा की हम कंप्यूटर के डेटा मतलब 0  & 1 डिजिटल डेटा 10101010 का कॉम्बिनेशन से कोई फाइल बनती है | जो बदल कर इसी तरीके में  11111111 हो जाये | फिर तो वो डेटा रहा ही नहीं जैसे कोई इमेज corrupt हो जाती है| कुछ  ठीक देखती है तो कुछ काम पिक्सेल में अलग लगती है | तो वो सही देखती ही नहीं है तो हम फाइल corrupt फाइल कहते है | यह इसलिए क्योकि वह जिस फॉर्म में जिस तरीके से arrange 10101010 में होते है वैसे नहीं रहते तो वो फाइल corrupt  हो जाती है | 
                                           तो अब सवाल  उठा है कि फाइल corrupt  कैसे होती है तो  में बता हूँ आपको या आप फाइल को ट्रांसफर कर रहे है ,read कर रहे है ,write कर रहे है ,या तो उसकी प्रोसेसिंग कर रहे है ,या तो उसको स्टोर कर रहे है | मतलब डेटा आ जा रहा है या तो आप कुछ भी कर रहे है मतलब कुछ भी ऑपरेशन किये जा रहे है उसके साथ किसी फाइल ये सब ही तो  बेसिक ऑपरेशन होते है | इस दौरान corruption होता है | हम बात करते है पुराने कंप्यूटर की जिसमे में स्पेस बहुत काम हुआ करता था 250mb इस तरीके की तुह harddisk भी आया करती थी | उस दौरान जो  फाइल स्टोर छोटी होती थी वो जाहिर से बात है | पहले जो स्टोरेज मीडिया वो काम स्पेस की होती थी | तो जितने काम साइज की होगी उतना काम डेटा आएगा जितने काम साइज डेटा आएगा उतना करप्शन के chance काम होंगे |हमने आज जो हार्डडिस्क के साइज तो बड़ा दिए पर जो करप्शन होने की जो स्थिति है वो आज भी वही है | और वो इवन बढ़ गयी है क्योकि हमने harddisk का साइज तो बड़ा कर दिया पर corruption रोकने के लिए हमने कुछ भी नहीं किया | तो वही टेक्नोलॉजी पहले भी होती थी वो आज भी है दिन पर दिन मेमोरीकार्ड का साइज बढ़ते जा रहे है | but शामे टेक्नोलॉजी पर काम रहे है | जब 2007 -2008  में 2gb का मेमोरीकार्ड देखते आज हम 32gb ,64gbमेमोरीकार्ड देखने को  मिलते है रीडिंग राइटिंग स्पीड अलग हो सकती है पर टेक्नोलॉजी शामे है मेमोरी कार्ड बनाने की तो corruption बढ़ा है | साइज बढ़ा तो करप्शन भी बढ़ा तो जब इसी डेटा के साथ ऑपरेशन करते है तो वो corrupt हो जाता है | तो इसको रोकने के कोई नए standard नहीं बनाये गए | 
                                             करप्शन दो प्रकार से होते है |
1. detected 
2. silent 
तो जो detected होते है उसमे तो error आ जाता है | तो मेमोरी या फाइल जे कोर्रुप्त हो गयी है तो उसको हम रिपेयर किया जा सकता है | इवन आपकी विंडो में कोई फाइल corrupt हो जाये तो उसपे रिपेयर कर सकते है | लेकिन कुछ ऐसे corruption  होते है जो silent होते है तो वो ज्यादा diedly होए है हम नहीं रहता पता कोनसी फाइल corrupt है फिर हमे  सिस्टम बदल न पढ़ता है | तो जे स्टैण्डर्ड नहीं बनाये गए है data corruption रोकने के लिए ऐसी बहुत बन रही है और बन भी चुकी है जहा दातकोर्रुप्त होता उसे वो ठीक कर देती है लेकिन स्टोरेज के साथ ऐसा नहीं है | तो ऐसी टेक्नोलॉजी developed करना चाहिए जो corruption को रोक सके |
 प्लीज like  एंड कमेंट thankyou |
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Friday, November 17, 2017

Why गूगल is not always right search engine truth & Guide

नमस्कार दोस्तों में अमित आज आपको  बताऊंगा कि क्या इंटरनेट पर भरोसा किया जा सकता है गूगल पर जो हम सर्च करते है वो सही है नहीं ?मैंने  कई लोगो को देखा है की कई लोगो को बीमारी या पिम्पल हो जाती है वो बीमारी का इलाज गूगल पर सर्च करने की गलती कर बैठते है |  अब आप बोलोगे की गलती शब्द क्यों इस्तेमाल कर रहे हो जरुरी नहीं आपको red कलर कर पिम्पल आपके फेस पर है या और कही तो आपको कैंसर ही होगा क्योकि गूगल के रिजल्ट कुछ भी गलत रिजल्ट आ सकता  है जैसे red  कलर का है तो  जे वाला कैंसर  है और ब्राउन  है तो जे वाला कैंसर है | गूगल पर  हर चीज़ नहीं होती   क्योकि 90 % लोग आपने सवाल गूगल पर ढूढ़ते है दोस्तों ये सच्चाई आप लोगो में कई लोग को कुछ समझ  नहीं आता फिर वो गूगल कर लेते है /क्योकि  वो गलत रिजल्ट भी वहाँ होते है |
                                      जैसे हर रेसेस कैंसर नहीं होता और हर बुखार टाइफाइड नहीं होता ये सब बाते आपको याद रखे ! लेकिन इसका ये भी मतलब नहीं है आप अपनी जाँच पड़ताल न कराये वो डॉक्टर जैसे कहे वैसे करे खुद डॉक्टर बने की कोशिश न करे |
क्यों गूगल पर विश्वास नहीं किया सकता | पहले जे समझते है कि गूगल क्या है?आपको पता है गूगल एक सर्च इंजन है|  क्या गूगल एक डॉक्टर है गूगल पर लोग सर्च है की बॉडी बनानी है कैसे बनाये और ब्रेकअप हो गया कैसे पैचाप  करे जे सब हम गूगल इस प्रकार के सवाल का उत्तर  हम गूगल कर सर्च करते है | में जे नहीं कह रहा की गूगल पर सब बुरे क्योकि गूगल कोई भी article ला  सकता है कोई भी मतलब जिसकी वेबसाइट में SEO अच्छा है | उसमे जे भी हो सकता है अगर आपको बॉडी  5 -5 पिज़्ज़ा रोज़ खाओ लिख देगा वो वहाँ और वाकी सारा कंटेंट सही है वह वेबसाइट के आर्टिकल में जब SEO के हिसाब से हो सकता है कोई चीज़ ठीक हो लेकिन वो फैक्ट न हो एक ब्लॉग कोई भी लेख सकता है | यूट्यूब पर वीडियो कोई भी बना सकता है  में भी बना सकता हूँ कोई डॉक्टर हो वो भी बना सकता है आप भी बना सकते हो तो वह डिग्री की कोई जरुरत नहीं है इसीलिए जरुरी नहीं किसी के ब्लॉग पर या वेबसाइट पर आपने जो पढ़ लिया वो सच है | नहीं वो ऐसा नहीं होता इसीलिए आप ऐसे फॉलो  करते भी हो तो कोई भी इंटरनेट पर फॉलो कर भी रहे हो तो क्योकि कही लोगों के पास रिसोर्सेज नहीं होते वो और किसी से पूछ नहीं सकते एमर्जेन्सेन्सी में कुछ सर्च करना है आप उसके पीछे साइंटिफिक कारण देखे कि क्यों ऐसा है अच्छा इस पिम्पल का मतलब ये है ऐसे कारण हो  है और क्या इन डेप्थ नॉलेज लिये | इन डेप्थ नॉलेज लेना जरुरी है यह नहीं की गूगल बोल दिया वो सच है तो  है | quora नाम  की वेबसाइट है जहाँ  सवाल जवाब होते है  वह भी कोई भी जवाब दे सकता है | तो आप ख्याल रखे इस चीज़ का अगर आप को हेल्थ कोई प्रॉब्लम है तो डॉक्टर की पास ही जाये और इंटरनेट हर चीज़ सही नहीं होती |
प्लीज  शेयर पोस्ट एंड कमेंट धन्यबाद | |













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Thursday, September 28, 2017

संस्कृत best लैंग्वेज फॉर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग

नमस्कार दोस्तों कैसे है आप आज में मेरे blog पहला E -learning का पोस्ट लिख रहा हूँ | आज में बताऊंगा की क्या संस्कृत best प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए या नहीं आज में फुल एक्सप्लेन करूगा इस topic पर तो दोस्तों जानते है संस्कृत लैंग्वेज बेस्ट है कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए हम सुनते हुये आये की संस्कृत लैंग्वेज suitable लैंग्वेज  है artifical इंटेलिएगेंस या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए machine टोनिंग ये सब चीजें के लिए तो है कथन में कितनी सच्चाई है तो क्यों है तो पूछिए ये दोस्तों आपको पता होना चाहिए तो अगर नहीं है तो क्यों नहीं है इसके पीछे क्या हुआ था | तो इस के लिए आपको कुछ बता दूँ की आपने संस्कृत तो पड़ी ही होगी | 6 ,7 ,8, क्लास में जो तीनो क्लास में  है ये तीनो क्लास में संस्कृत कंपल्सरी होती है जो question पेपर आता था उस समय बड़ी मुश्किल से हल  कर पाते थे वह पर diagram देखकर सेंटेंस लिखना होता था फिर  बाद में सेलेक्ट करने के लिए हो गया की आप 9 क्लास में सेलेक्ट कर सकते हो इंग्लिश ,हिंदी और भी सब्जेक्ट है |
                                   अब संस्कृत एक भाषा है | यह बहुत प्राचीन भाषा है आपको पता है भारत सभाविता सबसे पुराणी सभाविता है और इसके सारे literacture है जितने ने भी हज़ारों साल पुराने है पूरे विश्व में सबसे पुरानी साभिवता हमारी सभिवता है | और काफी पुराणी कही साल पहले की और जो हमारी  लैंग्वेज वो जो हजारो  साल पुराणी है जो उसमे लिटरेचर मिलते है और ज्ञान वेद है जितने भी वेद दौरान संस्कृत में मिलते है ये  लैंग्वेज संस्कृत ही है |
                                    संस्कृत बहुत सारी  लैंग्वेज की जननी है | मतलब बहुत सारे भाषा के जो word है अगर आप गूगल पर सर्च करोगे तो मिल जायेगा जो की संस्कृत से  लिये गए है | तो संस्कृत इन सबकी लैंग्वेज की mother है | तो इसलिए हम इस नेचुरल लैंग्वज कह सकते है |
                                   अब जो ये सारा कथन है संस्कृत लैंग्वेज बेस्ट  कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए कहा से शुरू हुई | इसके लिए मुझे आपको ले  जाना पड़ेगा 1985 NASA उसमे एक scientist रिक briggs जिसने जब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की जब initial stage था जब की हम कंप्यूटर से बात कर पाना  ये उस समय ये बात में कल्पना जैसा लगता था |पर सच्ची नहीं लगती थी | लेकिन आज तो ये काफी सच्ची हो गयी है | उसका आप सीधा साधा उदाहरण ले सकते हो कोताना ,fb का AI अभी तो जो शटडाउन कर दिया उन्होने उस ज़माने में कितना develop नहीं हुआ था तो वह पर चैलेंज ये था की हम किसी कंप्यूटर को अपनी नेचुरल लैंग्वेज साझा पाए मतलब हम कंप्यूटर से interact कर पाए अपनी natural लैंग्वेज में जिसमे हम बोलते है | क्युकी उस समय कंप्यूटर से इंटरैक्ट करने के लिए एक तरीका हुआ करता था वो होता था कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज c ,c ++,java या फिर और कोई भी कम्प्यूटरकी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज या लिस्ट जो नहीं पता लोगो को जो आर्टिफीसियल इंटेलिएगेंस में use होती है उसका इस्तेमाल करना तो नार्मल इसान ये तो नहीं लिख सकता है hello computer. htnl ,hello computer .python script और array ऐसे तो बात ही नहीं कर सकता इंसान वो ऐसे ही करेगा ना hello computer how are यू?
तो ऐसे करेगा तो ये चैलेंज था | कंप्यूटर के साथ इंटरैक्ट करने के लिए coding ही  इंसान की जबान में लैंग्वेज इस्तेमाल किया जा सके | और जिसे  की आप जानते हो ज्यादातर लैंग्वेज की जननी संस्कृत है | बहुत सारी लैंग्वेज की और संस्कृत सबसे पुरानी लैंग्वेज है जो श्रषि  पाणिनि जी थे उन्होंने क्या किया कि जो संस्कृत की grammar है उसे  develop किया जो उन्होंने काफी लिखी भी जो information हमे मिलती है पुराने literature में इसकी जो grammar बहुत ही systematic mathematic way में बना गयी  है जो natural लैंग्वेज उसे कंप्यूटर को समझने में आसानी हो लेकिन एक बात और सामने आती है | जो नेचुरल लैंग्वेज है वो आर्टिफीसियल intelligents में आर्टिफीसियल लैंग्वेज में भी  कर सकती है | जो की आपकी मॉडर्न लैंग्वेज है जैसे इंग्लिश इसलिए उसको belief हुआ की संस्कृत best लैंग्वेज हो सकती है कंप्यूटर को प्रोग्राम करने के लिए अगर ऐसा था तो आज लोग c ,c ++,java ना सीखकर संस्कृत क्यों नहीं सीखते जरा सुचिये फिर ये एक परेशानी आयी इसलिए नहीं हो पाया क्योकि जो संस्कृत से throught शेयर करना और coding करना impossible था | लेकिन इम्पॉसिबल तो नहीं बोलेगे क्यों  की impossible दुनिया में कुछ नहीं होता पर मुश्किल था | पर कंप्यूटर को ट्रेड करने में संस्कृत लैंग्वेज में पहले होता था |
                                                             दोस्तों आप कभी भी कोई चीज सीखते हो तो प्रॉयमरी रिसोर्स से ना की सेकेंडरी रिसोर्स में आपको एक उदाहरण देता हूँ मान के चलो की ताज महल का color रातोंरात में हरा हो गया | या फिर ताजमहल में कोई एक्सीडेंट हो गया या कोई दुर्घटना हो गयी हो या फिर किसी जगह कोई बह दुर्घटना हो गयी एक दोस्त दूसरे दोस्त को बताएगा फ़ोन करके की तुझे पता है ताजमहल में है ना दुर्घटना हो गयी की तीन ईट गिर गयी | तो वो दोस्तों वो आपने दोस्त दूसरे दोस्त को बोलेगा की तुझे पता है की ताजमहलमे पांच ीत गिर गयी | जो पहलती हुई चीजे आती है उन्होंने सच्ची नहीं होती फिर कही न कही mixed हो हो जाती है |
                          लेकिन अगर कोई इंसान तबदीस करना चाहे तो डायरेक्ट जाकर देखे प्राइमरी क्या हुआ है | तो आपको सच्चाई मिलेगी | अगर हम सब लैंग्वेज का इस्तेमाल करे तो जो बहुत सारी पीढ़ी दर पीढ़ी लैंग्वेज change होती हुई आयी है तो आज हमे ऐसी बेस्ट लैंग्वेज नहीं मिल पायेगी जिसकी grammar logic हो तो हम इसलिए ऐसी लैंग्वेज न करे जो सबसे पहले बनी है जो सबसे पुराणी जिसमे सबसे ज्यादा लॉजिक है | no doubt संस्कृत लैंग्वेज बहुत great है इसमें ऐसे नॉलेज की खजाने छुपे है जो आज की टेक्नोलॉजी कभी imagine भी नही कर सकती | इतनी नॉलेज है हमारे जितने भी वेद है उसमे तो ये पूरा केस था | इसलिए इस्तेमाल नहीं हुई क्योकि वो डाटा transmission के लिए अच्छी नहीं थी वो कंप्यूटर को ट्रेड के लिए अच्छी थी | उस समय  पर अब नहीं है अब तोह english में भी ट्रेड किया जा रह है | इस बात में सच्चाई नहीं है कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए वो तो कंप्यूटर ट्रेड करने के लिए थे 1985 में अब नहीं है इसका मतलब ये नहीं संस्कृत में कुछ नहीं है संस्कृत में ज्ञान का खजाना छुपा है thankyou अगर मेरा पोस्ट अच्छा लगा तो प्लीज like ,comment और  share|

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